AI की दुनिया में नई बहस: Google के CEO Demis Hassabis ने Sam Altman पर क्यों उठाई चिंता?

January 23, 2026

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती टेक्नोलॉजी बन चुकी है। हर दिन कोई नया टूल, नया अपडेट या नई बहस सामने आ जाती है। इसी बीच Google की AI यूनिट DeepMind के CEO Demis Hassabis का एक बयान काफी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने OpenAI के CEO Sam Altman और ChatGPT को लेकर एक अहम बात कही है।

Hassabis का मानना है कि शायद अब Sam Altman को भी वो बड़ी चिंता समझ में आ रही है, जिसे लेकर टेक एक्सपर्ट्स काफी समय से सवाल उठा रहे थे। यानी AI को जिस रफ्तार से आगे बढ़ाया जा रहा है, क्या वह सही दिशा में है या नहीं?

AI की तेज़ रफ्तार और बढ़ती बेचैनी

ChatGPT के आने के बाद AI आम लोगों की ज़िंदगी का हिस्सा बन गया है। लोग इससे पढ़ाई कर रहे हैं, काम कर रहे हैं, कंटेंट बना रहे हैं और फैसले लेने में भी मदद ले रहे हैं। लेकिन जितनी तेज़ी से AI आगे बढ़ा है, उतनी ही तेज़ी से इसके खतरे और सीमाओं पर भी सवाल उठे हैं।

Demis Hassabis का कहना है कि AI सिर्फ एक प्रोडक्ट नहीं है, बल्कि एक ऐसी तकनीक है जो लोगों के सोचने, समझने और भरोसा करने के तरीके को बदल रही है। ऐसे में अगर इसे बहुत जल्दी कमाई के मॉडल में डाल दिया गया, तो इससे भरोसे पर असर पड़ सकता है।

विज्ञापन बनाम भरोसा

इस बहस की एक बड़ी वजह AI में विज्ञापन को लेकर अलग-अलग सोच है। Google का साफ कहना है कि उसकी AI सर्विस में फिलहाल विज्ञापन जोड़ने की कोई योजना नहीं है। उनका मानना है कि जब कोई AI सवालों के जवाब देता है, तो उसमें किसी भी तरह का व्यावसायिक दबाव नहीं होना चाहिए।

वहीं दूसरी तरफ, OpenAI ने संकेत दिए हैं कि ChatGPT जैसे प्लेटफॉर्म पर भविष्य में विज्ञापन दिखाए जा सकते हैं। इससे कुछ लोगों को डर है कि कहीं AI जवाब देते समय निष्पक्ष न रह पाए। यही वो चिंता है, जिसकी ओर Hassabis इशारा कर रहे हैं।

Sam Altman की मजबूरी क्या है?

Sam Altman कई बार कह चुके हैं कि OpenAI का मकसद सिर्फ एक चैटबॉट बनाना नहीं है, बल्कि ऐसी AI तैयार करना है जो इंसानों की मदद कर सके। लेकिन सच्चाई यह भी है कि AI बनाना बेहद महंगा काम है। बड़े मॉडल्स को ट्रेन करने में भारी पैसा, बिजली और संसाधन लगते हैं।

ऐसे में OpenAI पर दबाव है कि वह खुद को आर्थिक रूप से मजबूत बनाए। इसी वजह से कमाई के नए रास्ते खोजे जा रहे हैं। कुछ लोग इसे ज़रूरी कदम मानते हैं, तो कुछ इसे जल्दबाज़ी कहते हैं।

Google बनाम OpenAI: सोच का फर्क

Google और OpenAI दोनों ही AI की दुनिया के बड़े नाम हैं, लेकिन उनकी सोच में फर्क साफ दिखाई देता है। Google ज्यादा सतर्क रवैया अपनाना चाहता है, जहां भरोसा, सुरक्षा और लंबे समय की स्थिरता अहम है। वहीं OpenAI तेजी से आगे बढ़ने और नए प्रयोग करने में यकीन रखता है।

Demis Hassabis का मानना है कि AI को सिर्फ दौड़ में जीतने के लिए नहीं, बल्कि सही तरीके से विकसित करना ज़रूरी है। अगर लोग AI पर भरोसा नहीं करेंगे, तो सबसे ताकतवर तकनीक भी बेकार साबित हो सकती है।

AI का भविष्य: सवाल अभी बाकी हैं

आज AI शिक्षा, हेल्थ, बिज़नेस और एंटरटेनमेंट हर जगह इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन इसके साथ ही डेटा प्राइवेसी, गलत जानकारी और इंसानों पर इसके असर जैसे सवाल भी खड़े हो रहे हैं। यही वजह है कि अब AI सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का मुद्दा बन चुका है।

Hassabis और Altman जैसे बड़े नामों की बातें दिखाती हैं कि AI की असली लड़ाई फीचर्स की नहीं, बल्कि भरोसे और नियंत्रण की है। आने वाले समय में वही कंपनी आगे निकलेगी, जो AI को ताकत के साथ-साथ समझदारी से भी संभालेगी।

निष्कर्ष

AI का भविष्य चमकदार जरूर है, लेकिन आसान नहीं। तेज़ी और सावधानी के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती है। Google और OpenAI की यह सोच की टक्कर हमें यह सिखाती है कि तकनीक जितनी शक्तिशाली हो, उतनी ही जिम्मेदारी के साथ उसे इस्तेमाल करना भी ज़रूरी है।

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