गुजरात भूकंप के लिहाज़ से हमेशा से संवेदनशील राज्य रहा है। 2001 का भुज भूकंप आज भी लोगों की यादों में ताज़ा है। अब उसी डर को कम करने और लोगों की जान बचाने के लिए गुजरात में एक नई और बेहद ज़रूरी टेक्नोलॉजी पर काम हो रहा है। अहमदाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ सीस्मोलॉजिकल रिसर्च (ISR) एक ऐसा सिस्टम तैयार कर रहा है जो भूकंप आने से कुछ सेकंड पहले ही लोगों को चेतावनी दे सकेगा।
यह सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित होगा और इसका मकसद है – हर सेकंड को ज़िंदगी में बदलना।
भूकंप से पहले कैसे मिलेगा अलर्ट?
जब कहीं भूकंप आता है, तो ज़मीन के अंदर दो तरह की तरंगें बनती हैं। पहली तरंग तेज़ होती है लेकिन नुकसान कम करती है, जबकि दूसरी तरंग थोड़ी देर से आती है और वही असली तबाही मचाती है। ISR का यह नया AI सिस्टम पहली तरंग को पहचान कर तुरंत अलर्ट भेज देगा।
मतलब अगर सब कुछ सही रहा, तो लोगों को 10 से 60 सेकंड पहले पता चल सकता है कि भूकंप आने वाला है।
अब आप सोच रहे होंगे – कुछ सेकंड से क्या होगा?
लेकिन यही कुछ सेकंड किसी की जान बचा सकते हैं।
इन कुछ सेकंड्स में क्या किया जा सकता है?
- लोग खुले में निकल सकते हैं
- लिफ्ट में फंसे लोग सतर्क हो सकते हैं
- अस्पतालों में मशीनें सुरक्षित की जा सकती हैं
- फैक्ट्रियों में गैस या बिजली बंद की जा सकती है
- ट्रेनें और मेट्रो रोकी जा सकती हैं
यानी नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
गुजरात में क्यों ज़रूरी है ये सिस्टम?
गुजरात के कई इलाके भूकंपीय ज़ोन में आते हैं। खासकर कच्छ, अहमदाबाद और आसपास के क्षेत्र। तेजी से बढ़ते शहर, ऊँची इमारतें और इंडस्ट्रियल एरिया इस खतरे को और बढ़ा देते हैं।
ISR पहले से ही पूरे राज्य में सैकड़ों सेंसर और सीस्मिक स्टेशन चला रहा है। अब AI की मदद से इन सभी डेटा को और स्मार्ट तरीके से समझा जाएगा।

AI क्या करेगा इस सिस्टम में?
AI लगातार ज़मीन की हलचल, कंपन और पुराने भूकंपों के पैटर्न को सीखता रहेगा।
जैसे-जैसे डेटा बढ़ेगा, सिस्टम और सटीक होता जाएगा।
इसका मतलब ये है कि:
- झूठे अलर्ट कम होंगे
- सही समय पर सही चेतावनी मिलेगी
- सिस्टम समय के साथ और बेहतर बनेगा
आम लोगों तक कैसे पहुंचेगा अलर्ट?
अभी सिस्टम डेवलपमेंट स्टेज में है, लेकिन भविष्य में अलर्ट इन तरीकों से मिल सकता है:
- मोबाइल ऐप
- सायरन सिस्टम
- सरकारी नेटवर्क
- इंडस्ट्रियल कंट्रोल सिस्टम
योजना ये है कि अलर्ट सीधा और साफ़ हो, ताकि किसी को समझने में समय न लगे।
सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, सोच में बदलाव
यह सिस्टम सिर्फ मशीन नहीं है, यह एक सोच है – कि भूकंप से लड़ने के बजाय उससे पहले तैयार हुआ जाए।
दुनिया के कुछ देशों जैसे जापान में ऐसे सिस्टम पहले से काम कर रहे हैं। अब भारत और खासकर गुजरात भी उसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
अगर यह सिस्टम पूरी तरह लागू हो जाता है, तो आने वाले समय में यह हजारों ज़िंदगियाँ बचा सकता है।






