भारत की चिप तैयारी: DLI 2.0 से टेक्नोलॉजी में नया मोड़!

January 28, 2026

भारत अब सेमीकंडक्टर यानी चिप के मामले में खुद को मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार ने डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम के दूसरे चरण, DLI 2.0, की रूपरेखा तैयार की है। इसका साफ मकसद है कि भारत में इस्तेमाल होने वाली ज्यादातर चिप्स देश में ही डिजाइन और तैयार हों। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में करीब 80 प्रतिशत चिप्स भारत में ही बनें।

आज हर चीज चिप पर चलती है। मोबाइल फोन, लैपटॉप, टीवी, कार, मेडिकल मशीन और यहां तक कि बिजली से चलने वाले साधारण उपकरण भी चिप्स के बिना अधूरे हैं। अभी भारत इन चिप्स के लिए बड़े पैमाने पर विदेशों पर निर्भर है। जब सप्लाई में दिक्कत आती है, तो इसका सीधा असर देश की इंडस्ट्री पर पड़ता है। DLI 2.0 इसी निर्भरता को कम करने की कोशिश है।

DLI 2.0 का फोकस क्या है

DLI 2.0 में सरकार ने छह खास तरह की चिप्स पर ध्यान देने का फैसला किया है। इनमें कंप्यूट से जुड़ी चिप्स, रेडियो फ्रीक्वेंसी चिप्स, नेटवर्किंग चिप्स, पावर मैनेजमेंट चिप्स, सेंसर और मेमोरी डिवाइस शामिल हैं। ये वही चिप्स हैं जिनकी जरूरत लगभग हर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में होती है। अगर भारत इन छह क्षेत्रों में मजबूत हो जाता है, तो देश का इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम काफी हद तक आत्मनिर्भर बन सकता है।

सरकार का मानना है कि इन चिप्स पर पकड़ बनने से मोबाइल, टेलीकॉम, ऑटोमोबाइल, डिफेंस और इंडस्ट्रियल सेक्टर को सीधा फायदा मिलेगा। इससे प्रोडक्शन की लागत भी कम होगी और समय पर सप्लाई संभव हो पाएगी।

india chip self reliance

फैब्लेस कंपनियों पर खास जोर

DLI 2.0 का एक अहम हिस्सा फैब्लेस सेमीकंडक्टर कंपनियां हैं। ये कंपनियां चिप डिजाइन करती हैं, लेकिन खुद फैक्ट्री नहीं चलातीं। सरकार का लक्ष्य है कि भारत में कम से कम 50 ऐसी मजबूत फैब्लेस कंपनियां तैयार हों। ये कंपनियां भारत के लिए ही नहीं, बल्कि ग्लोबल मार्केट के लिए भी चिप डिजाइन कर सकेंगी।

इससे भारत को सिर्फ एक मैन्युफैक्चरिंग देश नहीं, बल्कि चिप डिजाइन के बड़े केंद्र के रूप में पहचान मिल सकती है। साथ ही, स्टार्टअप्स और नई टेक कंपनियों को भी आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।

आत्मनिर्भरता क्यों जरूरी है

सेमीकंडक्टर सिर्फ टेक्नोलॉजी का मामला नहीं है, बल्कि यह देश की रणनीतिक जरूरत भी है। आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रिक व्हीकल, 5G, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और डिफेंस जैसे सेक्टर तेजी से बढ़ने वाले हैं। इन सभी में एडवांस चिप्स की जरूरत होती है। अगर ये चिप्स देश में बनेंगी, तो भारत को किसी और पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

सरकार का लक्ष्य है कि 2035 तक भारत दुनिया के शीर्ष सेमीकंडक्टर देशों में शामिल हो। DLI 2.0 को इसी लंबे विजन का हिस्सा माना जा रहा है।

रोजगार और भविष्य की तस्वीर

DLI 2.0 से रोजगार के नए मौके भी बनेंगे। चिप डिजाइन, रिसर्च, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में हजारों नौकरियां पैदा हो सकती हैं। इससे देश के युवाओं को विदेश जाने के बजाय भारत में ही अच्छे अवसर मिलेंगे।

कुल मिलाकर, DLI 2.0 सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं है। यह भारत के टेक्नोलॉजी भविष्य की नींव रखने की कोशिश है। अगर यह योजना सही तरीके से लागू होती है, तो आने वाले 10 से 15 साल में भारत चिप सेक्टर में एक मजबूत और भरोसेमंद नाम बन सकता है।

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