भारत सरकार ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए नए IT नियम लागू किए हैं, जिनमें एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है, अब AI द्वारा जनरेट किए गए कंटेंट को लेबल करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, प्लेटफार्मों को अवैध कंटेंट को तीन घंटे के भीतर हटाने का आदेश दिया गया है। यह बदलाव भारत में डिजिटल दुनिया के लिए बड़ा कदम है, जिसका उद्देश्य ऑनलाइन सुरक्षा को बढ़ावा देना और गलत सूचनाओं को नियंत्रित करना है।
AI कंटेंट लेबलिंग का महत्व
हाल ही में जारी किए गए नियमों के अनुसार, हर AI-जनित सामग्री को साफ तौर पर लेबल किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि अब सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर आने वाली उन सामग्री को जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा बनाई गई हैं, उन्हें स्पष्ट रूप से दर्शाना होगा। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई वीडियो, इमेज या पोस्ट AI द्वारा बनाई जाती है, तो उस पर एक स्पष्ट निशान होगा जो दर्शाएगा कि यह सामग्री मानव द्वारा नहीं, बल्कि मशीन द्वारा उत्पन्न की गई है।
यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि AI द्वारा जनरेट किए गए कंटेंट में अक्सर गलत जानकारी, भ्रामक समाचार या यहां तक कि असत्य आरोपों का प्रचार किया जाता है। इस नई पहल से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि दर्शक यह पहचान सकें कि कौन सी सामग्री वास्तविक है और कौन सी सामग्री तकनीकी तरीके से बनाई गई है।
अवैध कंटेंट के लिए समय सीमा
भारत सरकार ने इन नए नियमों के तहत प्लेटफार्मों को अवैध कंटेंट के लिए बहुत सख्त दिशा-निर्देश दिए हैं। अब Google, YouTube, Instagram और अन्य प्लेटफार्मों को अवैध कंटेंट को तीन घंटे के भीतर हटाने का आदेश दिया गया है। इसका मतलब यह है कि अगर किसी प्लेटफॉर्म पर कोई अवैध या अपमानजनक सामग्री पोस्ट की जाती है, तो उस कंटेंट को प्लेटफॉर्म को तीन घंटे के अंदर हटा देना होगा।
यह निर्णय भारत में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह नियम खासकर उन कंटेंट को निशाना बनाएंगे जो समाज में नफरत, हिंसा या भेदभाव फैलाने के लिए होते हैं। तीन घंटे की समय सीमा के भीतर हटाने से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इन प्रकार के कंटेंट का प्रभाव कम से कम हो और जनता तक पहुंचने से पहले ही वे हट जाएं।
प्लेटफार्मों पर बढ़ी जिम्मेदारी
नए IT नियमों के तहत प्लेटफार्मों की जिम्मेदारी अब बढ़ गई है। पहले, प्लेटफार्मों को गलत सूचना और नफरत फैलाने वाली सामग्री के लिए सिर्फ रिपोर्टिंग की सुविधा देने की आवश्यकता होती थी। लेकिन अब उन्हें ऐसे कंटेंट को खुद ही मॉनिटर करना होगा और उसकी पहचान करके उचित कदम उठाना होगा।
इस बदलाव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर केवल वही सामग्री दिखाई दे जो समाज के लिए उपयुक्त हो। इस कदम से कंटेंट की गुणवत्ता बढ़ेगी और ऑनलाइन समाज में एक स्वस्थ वातावरण बनेगा।
डिजिटल दुनिया में बदलाव की आवश्यकता
भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है, और इसके साथ ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट की मात्रा भी बढ़ी है। इस बढ़ती हुई संख्या को देखते हुए, सरकार को यह जरूरी लगा कि डिजिटल दुनिया को एक मजबूत और सुरक्षित दिशा में ले जाया जाए। नए नियमों के तहत, यह कोशिश की जाएगी कि कोई भी गलत जानकारी या नफरत फैलाने वाला कंटेंट इंटरनेट पर न फैले।
इस बदलाव से, सरकार ने यह भी साबित किया है कि वह डिजिटल युग में समाज के हितों की रक्षा के लिए सख्त कदम उठा रही है। हालांकि, यह बदलाव प्लेटफार्मों के लिए एक चुनौती हो सकता है, क्योंकि उन्हें अपने कंटेंट मॉनिटरिंग सिस्टम को और भी ज्यादा सख्त और कुशल बनाना होगा।
भारत सरकार के नए IT नियमों से यह साफ है कि सरकार का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफार्मों पर ज्यादा नियंत्रण और निगरानी रखना है। AI कंटेंट लेबलिंग और तीन घंटे में अवैध कंटेंट हटाने के नए नियम, डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करेंगे और समाज में बढ़ते हुए गलत सूचना के प्रभाव को कम करने में मदद करेंगे।
यह कदम न केवल भारतीय समाज के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह एक वैश्विक उदाहरण प्रस्तुत करेगा कि कैसे सरकारें और प्लेटफार्मों को मिलकर ऑनलाइन सुरक्षा और जिम्मेदारी को बढ़ावा देना चाहिए।







