भारत अब सिर्फ चिप बनाने वाला देश नहीं रहना चाहता, बल्कि डिज़ाइन, शोध और उन्नत तकनीक में खुद मजबूत बनना चाहता है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए India Semiconductor Mission 2.0 लॉन्च किया गया है। यह योजना पहले वाले ISM 1.0 से आगे बढ़कर डीप-टेक स्टार्टअप्स को अवसर देने, डिज़ाइन इकोसिस्टम बनाने, और उज़ाेउपकरण निर्माण (equipment manufacturing) के लिए है।
पहले ISM 1.0 का फोकस चिप फैक्ट्रियों और पैकेजिंग यूनिटों को भारत में लाने पर था। अब ISM 2.0 का लक्ष्य इसे एक कदम आगे ले जाना है।
स्टार्टअप्स को बड़ी मौका
ISM 2.0 का सबसे बड़ा लक्ष्य यह है कि छोटे-बड़े स्टार्टअप्स भी चिप डिज़ाइन और उन्नत तकनीक के क्षेत्र में भारत से दुनिया के साथ मुकाबला कर सकें। मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार चाहती है कि भारत से अगला Qualcomm, NVIDIA या Broadcom जैसे डिज़ाइन कंपनी उभरें।
आसान भाषा में कहें, तो भारत में ऐसे लोग जो डिज़ाइन, सॉफ्टवेयर, इंजीनियरिंग या शोध में सक्षम हैं, उन्हें अब सीधे सरकार के समर्थन और अवसर मिलेंगे, ताकि वे भारत के अंदर चिप-तकनीक के लिए नए समाधान बना सकें।
10 चिप प्लांट और निवेश
वर्तमान में भारत में 10 सेमिकंडक्टर यूनिट्स (चिप प्लांट) तैयार हो रही हैं, जिनमें से पहले प्लांट ने कमर्शियल प्रोडक्शन (व्यापारिक उत्पादन) भी शुरू कर दिया है। बाकी प्लांट भी जल्द उत्पादन शुरू करेंगे। इन सभी प्रोजेक्टों में करीब ₹1.60 लाख करोड़ का निवेश शामिल है।
यह दिखाता है कि सिर्फ डिज़ाइन ही नहीं, बल्कि निर्माण-संभलने (manufacturing) वाली क्षमता भी भारत में तेजी से तैयार हो रही है। इससे jobs, तकनीकी कौशल, और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को एक साथ बढ़ावा मिलेगा।
स्टूडेंट्स के लिए अवसर
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि चिप-टेक इंडस्ट्री में तेजी से टैलेंट गैप (कौशल की कमी) है। दुनिया भर में लगभग 20 लाख लोगों (2 million) की कमी है और भारत में युवाओं के पास यह अवसर है कि वे इस कमी को पूरा करें और खुद स्मार्ट जॉब्स पाएं।
इसलिए सरकार ने विश्वविद्यालयों की संख्या भी बढ़ाने का निर्णय लिया है। ISM 1.0 में 350 यूनिवर्सिटी थीं, अब इसे बढ़ाकर 500 यूनिवर्सिटी तक लाने की योजना है ताकि और ज्यादा छात्रों को सेमिकंडक्टर, डिज़ाइन, कंसल्टिंग और रिसर्च में सीखने और करियर बनाने का मौका मिले।






