भारत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चल रहे गलत, भ्रामक और अवैध कंटेंट को नियंत्रित करने के लिए कुछ अहम बदलाव किए हैं। ये बदलाव खासतौर पर Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code के तहत किए गए हैं। इन नियमों के मुताबिक, अब सोशल मीडिया कंपनियों को अवैध कंटेंट को हटाने के लिए महज 3 घंटे का समय मिलेगा।
सोशल मीडिया पर कंटेंट हटाने की नई समयसीमा
पहले, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को किसी भी आपत्तिजनक सामग्री को हटाने के लिए 36 घंटे का समय दिया जाता था। लेकिन अब सरकार ने इसे घटाकर सिर्फ 3 घंटे कर दिया है। इसका मकसद है कि गलत सूचनाओं का फैलाव ज्यादा न हो, और यदि कोई सामग्री अवैध पाई जाती है तो उसे तुरंत हटाया जा सके। यह नया नियम फरवरी 2026 से लागू हो जाएगा।
AI द्वारा जनरेटेड कंटेंट पर नया नियम
अब एक और अहम बदलाव यह है कि AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) से तैयार कंटेंट को प्लेटफॉर्म्स पर स्पष्ट रूप से ‘AI‑जनरेटेड’ के लेबल के साथ दिखाना होगा। इसका मतलब है कि अगर किसी फोटो, वीडियो या ऑडियो को किसी मशीन ने बनाया है, तो उसे पहचानने योग्य बनाना अनिवार्य होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि उपयोगकर्ता जान सकें कि यह सामग्री मानव द्वारा नहीं बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा बनाई गई है।
सभी सोशल मीडिया कंटेंट पर लागू होंगे नए नियम
ये नए नियम केवल AI से जनरेटेड कंटेंट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सभी प्रकार के सोशल मीडिया कंटेंट पर लागू होंगे। चाहे वह वीडियो हो, टेक्स्ट पोस्ट हो या कोई फोटो हो, अगर वह अवैध, भ्रामक या किसी नियम के खिलाफ पाया जाता है तो उसे 3 घंटे के भीतर हटाना जरूरी होगा। यह बदलाव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ज्यादा जवाबदेह और पारदर्शी बनाएगा।
क्या छोटे प्लेटफॉर्म्स के लिए यह बदलाव चुनौतीपूर्ण होगा?
इस नए नियम का पालन करना बड़े प्लेटफॉर्म्स के लिए तो आसान होगा, लेकिन छोटे प्लेटफॉर्म्स के लिए यह चुनौतीपूर्ण हो सकता है। छोटे प्लेटफॉर्म्स के पास उस गति से सामग्री की मॉडरेशन करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते हैं। इसके अलावा, गलत सूचनाओं को हटाने के फैसले जल्दी से लेने के कारण कभी‑कभी कुछ वैध सामग्री भी हटाई जा सकती है, जो एक विवाद का कारण बन सकता है।
गलत सूचनाओं को फैलने से रोकना
सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं का फैलाव तेजी से होता है और इसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है। अगर गलत जानकारी समय पर हटाई नहीं जाती, तो यह समाज में गुमराह करने वाला हो सकता है और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है। इन नए नियमों से सरकार का उद्देश्य है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गलत जानकारी और अवैध सामग्री को पहले से ही रोका जा सके।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल?
इस बदलाव के साथ कुछ आलोचनाएँ भी सामने आई हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इतना कम समय (3 घंटे) सामग्री हटाने का फैसला करना हमेशा सही नहीं हो सकता। इससे वैध और सही सामग्री भी गलती से हट सकती है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल उठा सकता है। छोटे प्लेटफॉर्म्स और एंटरप्राइजेस इस नई समय सीमा का पालन करने में समस्याएं महसूस कर सकते हैं, क्योंकि उनके पास इतनी बड़ी टीम और संसाधन नहीं होते।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अधिक जवाबदेह बनाना
इन बदलावों के पीछे सरकार का उद्देश्य है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाया जाए। समय के साथ, सोशल मीडिया का प्रभाव बढ़ता जा रहा है और इसका गलत उपयोग भी हो रहा है। इसलिए सख्त नियमों की आवश्यकता महसूस की गई है ताकि गलत सूचनाओं का फैलाव रोका जा सके और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर किसी भी तरह के अवैध कंटेंट को तुरंत हटाया जा सके।
भविष्य में क्या होगा?
इस बदलाव से यह देखना दिलचस्प होगा कि सोशल मीडिया कंपनियाँ इन नए नियमों को कितनी जल्दी अपनाती हैं और इसके प्रभाव क्या होते हैं। सरकार ने साफ कहा है कि अगर प्लेटफॉर्म्स इन नियमों का पालन नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। भारत का यह कदम सोशल मीडिया नियमन में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है, और इससे डिजिटल दुनिया को एक नई दिशा मिल सकती है।






