दुनिया भर में मोबाइल की कीमत तय करने वाला एक “छुपा हुआ” पार्ट फिर चर्चा में है: मेमोरी चिप। जिस तरह AI के लिए डेटा सेंटर और सर्वर तेजी से बन रहे हैं, उसी ने मेमोरी चिप्स की सप्लाई पर बड़ा दबाव डाल दिया है। नतीजा यह कि अब स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों के सामने सीधा सवाल है: क्या बढ़ी हुई लागत ग्राहक पर डालें, या खुद झेलें?
Apple पर क्यों है सबसे ज्यादा फोकस?
इस बार चर्चा Apple पर इसलिए ज्यादा है क्योंकि iPhone अक्सर बाजार का ट्रेंड सेट करता है। Apple के CEO टिम कुक ने निवेशकों से बातचीत में साफ कहा कि मेमोरी चिप की कीमतों में तेज बढ़ोतरी की उम्मीद है। हालांकि उन्होंने यह नहीं कहा कि iPhone की कीमतें बढ़ेंगी या नहीं। उन्होंने बस यह बताया कि कंपनी के पास लागत को संभालने के कई तरीके हैं। यानी फैसला अभी पूरी तरह खुला है।
मेमोरी चिप संकट आया कहां से?
सबसे बड़ी वजह है AI इंफ्रास्ट्रक्चर। Meta, Google और Microsoft जैसी बड़ी कंपनियां AI सिस्टम और डेटा सेंटर के लिए भारी मात्रा में मेमोरी चिप्स खरीद रही हैं। मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनियां भी डेटा सेंटर वाले ऑर्डर को ज्यादा प्राथमिकता दे रही हैं, क्योंकि वहां मुनाफा बेहतर होता है। इसी वजह से फोन और लैपटॉप जैसे कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के लिए वही चिप्स अब कम पड़ रहे हैं।
फोन की लागत कैसे बढ़ती है?
स्मार्टफोन में DRAM मेमोरी बहुत जरूरी होती है ताकि भारी ऐप्स, गेम्स और नए AI फीचर्स स्मूद चलें। जब DRAM महंगी होती है, तो हर फोन की कॉस्ट ऊपर जाती है। और लागत बढ़ेगी तो कंपनियों के सामने दो ही रास्ते बचते हैं: प्राइस बढ़ाओ या मार्जिन कम करो।
Apple का फैसला बाकी ब्रांड्स को कैसे बदल सकता है?
Apple अगर कीमतें नहीं बढ़ाता, और बाकी Android ब्रांड्स बढ़ाने पर मजबूर हो जाते हैं, तो iPhone तुलनात्मक रूप से ज्यादा वैल्यू वाला लग सकता है। इससे Apple को नए ग्राहक और ज्यादा मार्केट शेयर मिल सकता है। लेकिन इसमें एक रिस्क भी है: अगर कीमत नहीं बढ़ाई गई, तो मुनाफे पर दबाव आ सकता है और निवेशक खुश नहीं होंगे।
दूसरी तरफ, अगर Apple कीमत बढ़ाता है, तो बाकी कंपनियों के लिए भी कीमत बढ़ाने का “स्पेस” बन जाएगा। फिर पूरी इंडस्ट्री में महंगे फोन का नया दौर शुरू हो सकता है।
मार्केट पर इसका क्या असर पड़ सकता है?
इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, यही अभी सबसे बड़ा सवाल है कि Apple क्या करेगा। माना जा रहा है कि मेमोरी चिप की कमी इस साल स्मार्टफोन बाजार में 2023 के बाद पहली बार सालाना गिरावट की एक वजह बन सकती है। यानी मांग होते हुए भी सप्लाई और कॉस्ट का दबाव बाजार को स्लो कर सकता है।
सप्लाई चेन में क्या चल रहा है?
कुछ संकेत सप्लाई चेन से भी मिल रहे हैं। Qualcomm ने भी कहा है कि उसके कुछ हैंडसेट ग्राहकों के पास पर्याप्त मेमोरी चिप्स नहीं हैं। खासकर चीन के कुछ बड़े फोन ब्रांड्स को चिप्स की कमी के चलते अपने फोन प्रोडक्शन की प्लानिंग कम करनी पड़ रही है, जबकि मांग बनी हुई है।
Apple को यहां फायदा क्यों मिल सकता है?
कई विश्लेषक मानते हैं कि Apple अपने लंबे समय से जुड़े सप्लायर्स जैसे Samsung Electronics, SK Hynix और Micron से बेहतर तरीके से सप्लाई सुरक्षित कर सकता है। यह फायदा हर ब्रांड को नहीं मिलता, खासकर उन कंपनियों को जो हर साल सप्लाई के लिए नए सौदे करती हैं।
आगे क्या होगा?
दिलचस्प बात यह है कि Apple ने iPhone 17 मॉडल्स की मांग को देखते हुए मजबूत बिक्री वृद्धि का अनुमान भी दिया है। यानी मांग ठीक है, लेकिन लागत का दबाव भी बढ़ रहा है। अब असली खेल यह है कि Apple बढ़ी हुई लागत “अंदर” संभालता है या “बाहर” ग्राहक तक पहुंचाता है। आने वाले महीनों में iPhone की कीमत को लेकर जो भी फैसला होगा, वह सिर्फ Apple नहीं, पूरी स्मार्टफोन इंडस्ट्री की दिशा तय करेगा।







