भारत ने ड्रोन हमलों से निपटने का खेल बदल दिया, लेजर हथियार तकनीक तैयार !

March 25, 2026

new laser technology to stop drones

नई दिल्ली: भारत ड्रोन हमलों को रोकने के लिए एक नई तरह की रक्षा तकनीक ला रहा है। देश की रक्षा अनुसंधान एजेंसी डीआरडीओ (DRDO) ने लेजर आधारित हथियार प्रणाली विकसित की है, जिसका उद्देश्य है ड्रोन, छोटे UAV और अन्य हवाई खतरों को तेज़ी से तथा सटीक ढंग से नष्ट करना। यह तकनीक पारंपरिक मिसाइल और गोलियों की तुलना में तेज़, सस्ता और अधिक प्रभावी तरीका माना जा रहा है।

ड्रोन अब युद्ध और सुरक्षा की दुनिया में सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं। छोटे‑छोटे ड्रोन आसानी से सीमा पार कर सकते हैं, निगरानी कर सकते हैं और कभी‑कभी हमला भी कर सकते हैं। इन्हें रोकना पारंपरिक हथियारों से महंगा और मुश्किल होता है। इसी समस्या का समाधान ढूंढने के लिए भारत ने लेजर आधारित हथियार प्रणाली (Laser Directed Energy Weapon) तैयार की है।

लेजर हथियार क्या है और कैसे काम करता है

लेजर हथियार एक तेज रोशनी की किरण बनाता है जो लक्ष्य की ओर बहुत जल्दी (रोशनी की गति से) बढ़ती है। जैसे ही यह किरण किसी ड्रोन के हिस्से पर लगती है, वह तुरंत खराब हो जाता है और गिर जाता है। यह तरीका पारंपरिक मिसाइल की तुलना में काफी तेज़ और सस्ता साबित होता है, क्योंकि मिसाइलें महंगी होती हैं और एक‑एक इस्तेमाल पर भारी खर्च होता है। लेजर से सिर्फ बिजली की ही खपत होती है।

यह सिस्टम लक्षित ढूँढने वाला रडार और कैमरा दोनों का इस्तेमाल करता है। जैसे ही किसी ड्रोन को पहचाना जाता है, लेजर beam उस पर निशाना साधता है। इससे लक्ष्य तुरंत निष्क्रिय हो जाता है और आस‑पास के लोगों या जगह पर नुकसान भी कम होता है।

Mk‑IIA और भविष्य की तकनीक

डीआरडीओ पहले से ही कई लेजर हथियार वेरिएंट विकसित कर चुका है। सबसे नया वर्ज़न Mk‑IIA, जिसे “सहस्त्र शक्ति” नाम भी दिया गया है, अपनी श्रेणी में काफी प्रगतिशील माना जाता है। यह 30 किलोवाट की क्षमता तक पहुंच सकता है और कई किलोमीटर की दूरी पर हवाई लक्ष्य को टार्गेट कर सकता है। इस तकनीक का परीक्षण सफल रहा है और इसे आगे और बेहतर बनाने की दिशा में भी काम जारी है।

भविष्य में इससे भी अधिक शक्तिशाली लेजर सिस्टम विकसित करने की तैयारी है, ताकि दूरी और क्षमता दोनों बढ़ें और युद्ध के कठिन परिदृश्यों में भी यह तकनीक काम आए।

क्यों यह तकनीक खास है

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह तेज़, सटीक और कम खर्चीला है। मिसाइलों पर खर्च होने वाला लाखों का पैसा यहां बिजली में बदल जाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो एक ही सिस्टम से कितने भी ड्रोन को समाप्त किया जा सकता है, जब तक बिजली उपलब्ध रहती है। इसके अलावा यह तकनीक शोर‑शोरार में कम होता है और कम दूरी पर टेस्ट होने पर आस‑पास के इलाकों में नुकसान की संभावना भी कम रहती है।

यह अपने आप में एक बड़ा बदलाव है क्योंकि पहले ड्रोन जैसी छोटी मशीनों को रोकना कठिन होता था। मिसाइलें बड़ी और महंगी हैं, और जल्दी‑जल्दी नई मिसाइलों को तैनात करना मुश्किल होता है। लेजर सिस्टम के साथ यह काम कहीं अधिक सरल और प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

रक्षा क्षमता को बढ़ाने में मदद

इस तकनीक से भारतीय सुरक्षा बलों को नई ताकत और आत्म‑निर्भर रक्षा क्षमता मिलेगी। आम तौर पर सीमा पर या महत्वपूर्ण ढांचों के पास ड्रोन हमलों का खतरा बना रहता है। ऐसे में यह तकनीक उनके लिए एक तेज़ और असरदार विकल्प साबित हो सकती है। यह सिस्टम सेना, वायु सेना, बंदरगाह और अन्य संवेदनशील इलाकों को सुरक्षित रखने में उपयोगी होगा।

एक नई सुरक्षा दिशा

लेजर हथियार तकनीक भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में रखती है जो इस तरह की उन्नत रक्षा प्रणाली विकसित कर रहे हैं। यह न सिर्फ़ ड्रोन खतरों का मुकाबला करेगा बल्कि भविष्य में और भी अलग‑अलग प्रकार के हवाई खतरों के खिलाफ काम आ सकता है। इस तकनीक के आने से भारत की रक्षा क्षमता में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

 

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