भारत में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का प्रस्ताव! (Social Media ban for teens in India)

January 31, 2026

social media ban for teens in india

भारत में इन दिनों एक नया मुद्दा तेजी से चर्चा में है। बात हो रही है 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने की। एक सांसद ने संसद में ऐसा प्रस्ताव रखा है, जिसके बाद देशभर में बहस शुरू हो गई है। माता-पिता, शिक्षक, टेक एक्सपर्ट और आम लोग, सभी अपनी राय रख रहे हैं।

आज लगभग हर बच्चे के हाथ में स्मार्टफोन है। पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक सब कुछ मोबाइल पर ही हो रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सोशल मीडिया बच्चों के लिए फायदेमंद है या नुकसानदायक।

क्या है पूरा प्रस्ताव

यह प्रस्ताव एक प्राइवेट मेंबर बिल के तौर पर पेश किया गया है। मतलब यह सरकार का आधिकारिक कानून नहीं है, बल्कि एक सांसद की तरफ से रखा गया सुझाव है।

इस बिल में कहा गया है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया अकाउंट बनाने या इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं होनी चाहिए। अगर कोई बच्चा नियम तोड़ता है, तो उसका अकाउंट बंद किया जा सकता है।

सबसे अहम बात यह है कि उम्र जांचने की जिम्मेदारी सीधे सोशल मीडिया कंपनियों पर डालने की बात कही गई है। यानी प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका यूजर सच में कितनी उम्र का है।

भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या बहुत बड़ी है। करीब एक अरब लोग इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं और सैकड़ों मिलियन लोग स्मार्टफोन चला रहे हैं। ऐसे में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन चुका है।

सांसदों की चिंता क्या है

प्रस्ताव लाने वाले सांसद का कहना है कि बच्चे सोशल मीडिया के आदी होते जा रहे हैं। इसका असर उनकी पढ़ाई, नींद, मानसिक सेहत और परिवार के साथ समय पर पड़ रहा है।

उनका मानना है कि लगातार स्क्रीन देखने से बच्चों में चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। कई मामलों में ऑनलाइन कंटेंट बच्चों को गलत दिशा में भी ले जा रहा है। इसी वजह से उन्होंने उम्र आधारित पाबंदी का सुझाव दिया है।

उनका यह भी कहना है कि अगर अभी कदम नहीं उठाया गया, तो आने वाले समय में यह समस्या और बड़ी हो सकती है।

social media ban for teens in india

दुनिया में पहले से चल रही है ऐसी बहस

भारत अकेला देश नहीं है जहां यह चर्चा हो रही है। कुछ देशों ने पहले ही बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर सख्ती शुरू कर दी है।

ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने का फैसला किया है। फ्रांस ने भी कम उम्र के बच्चों के लिए इसी तरह की नीति पर सहमति दी है। ब्रिटेन, ग्रीस और डेनमार्क जैसे देश भी इस विषय पर विचार कर रहे हैं।

हर जगह एक ही सवाल उठ रहा है, बच्चों की सुरक्षा ज्यादा जरूरी है या उनकी डिजिटल आज़ादी।

टेक कंपनियों और एक्सपर्ट्स की चिंता

सोशल मीडिया कंपनियों का मानना है कि पूरी तरह बैन लगाने से बच्चे ऐसे प्लेटफॉर्म्स की तरफ जा सकते हैं जो ज्यादा असुरक्षित होते हैं। वहां न तो कंट्रोल होता है और न ही निगरानी।

कुछ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि पाबंदी से बेहतर है सही गाइडेंस। बच्चों को सिखाया जाए कि सोशल मीडिया कैसे जिम्मेदारी से इस्तेमाल करें। माता-पिता की भूमिका भी यहां बहुत अहम मानी जा रही है।

तकनीकी जानकारों का यह भी कहना है कि उम्र की सही जांच करना आसान नहीं होता, और इससे प्राइवेसी से जुड़े नए सवाल खड़े हो सकते हैं।

आगे क्या हो सकता है

फिलहाल यह सिर्फ एक प्रस्ताव है। इसे कानून बनने में लंबा रास्ता तय करना होगा। संसद में चर्चा होगी, अलग-अलग पक्ष अपनी राय रखेंगे और फिर कोई फैसला लिया जाएगा।

लेकिन इतना तय है कि इस मुद्दे ने भारत में डिजिटल सेफ्टी पर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में सरकार बच्चों के ऑनलाइन इस्तेमाल को लेकर कुछ नए नियम ला सकती है।

यह मामला सिर्फ सोशल मीडिया का नहीं है, बल्कि यह बच्चों के भविष्य, मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल दुनिया में उनकी सुरक्षा से जुड़ा है।

सोशल मीडिया आज हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है, लेकिन बच्चों के मामले में संतुलन बेहद जरूरी है। न पूरी आज़ादी सही है और न ही पूरी पाबंदी।

अब देखना यह है कि भारत इस चुनौती को कैसे संभालता है। क्या सख्त कानून आएंगे, या जागरूकता और जिम्मेदारी पर जोर दिया जाएगा। जो भी फैसला होगा, उसका असर आने वाली पीढ़ी पर साफ दिखाई देगा।

Latest Stories

Leave a Comment