Google, Meta और TikTok पर EU में बड़ी शिकायत, ऑनलाइन स्कैम्स को लेकर बढ़ी मुश्किलें!

आज के समय में लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर पहले से कहीं ज्यादा भरोसा करने लगे हैं। लेकिन इसी के साथ इंटरनेट फ्रॉड और फेक निवेश स्कैम्स भी तेजी से बढ़ रहे हैं। अब यूरोपियन यूनियन (EU) में Google, Meta और TikTok जैसी बड़ी टेक कंपनियां बड़े विवाद में फंस गई हैं। इन कंपनियों पर आरोप है कि ये अपने प्लेटफॉर्म पर चल रहे फाइनेंशियल स्कैम्स को रोकने में सही तरीके से काम नहीं कर रहीं।

आखिर मामला क्या है?

यूरोप के कई कंज्यूमर ग्रुप्स ने इन कंपनियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। आरोप है कि सोशल मीडिया और सर्च प्लेटफॉर्म पर फेक निवेश योजनाएं, नकली ट्रेडिंग ऐप्स और जल्दी पैसा कमाने वाले झूठे विज्ञापन लगातार दिखाए जा रहे हैं।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि जब इन विज्ञापनों की शिकायत की जाती है, तब भी उन्हें तुरंत हटाया नहीं जाता। इसी वजह से अब यह मामला यूरोपियन रेगुलेटर्स तक पहुंच गया है।

हजारों यूजर्स हो रहे हैं प्रभावित

रिपोर्ट्स के मुताबिक दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच करीब 900 संदिग्ध फ्रॉड विज्ञापनों की शिकायत की गई थी। लेकिन इनमें से सिर्फ लगभग 27% विज्ञापन ही हटाए गए।

बाकी शिकायतों को या तो रिजेक्ट कर दिया गया या फिर लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है, क्योंकि कई यूजर्स अपनी मेहनत की कमाई गंवा चुके हैं।

Digital Services Act के तहत बढ़ सकती है मुश्किल

यह पूरा मामला यूरोपियन यूनियन के Digital Services Act (DSA) कानून के तहत उठाया गया है। इस कानून के मुताबिक बड़ी टेक कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद गैरकानूनी और नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट को जल्दी हटाएं।

अगर जांच में कंपनियां नियमों का पालन करती नहीं पाई गईं, तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। यूरोप पहले भी बड़ी टेक कंपनियों के खिलाफ सख्त कदम उठाता रहा है।

Google, Meta और TikTok ने क्या कहा?

इन कंपनियों ने कहा है कि वे पहले से ही AI टेक्नोलॉजी और ह्यूमन मॉडरेशन की मदद से स्कैम्स रोकने की कोशिश कर रही हैं।

कंपनियों का कहना है कि ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले लोग हर दिन नए तरीके निकालते हैं, इसलिए हर फर्जी विज्ञापन को तुरंत पकड़ना आसान नहीं होता। हालांकि आलोचकों का कहना है कि टेक कंपनियों को यूजर्स की सुरक्षा को ज्यादा गंभीरता से लेना चाहिए।

भारत के लिए भी क्यों अहम है यह मामला?

यह मामला सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं है। भारत में भी हर दिन सोशल मीडिया और ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए हजारों लोग ठगी का शिकार बन रहे हैं।

फेक ट्रेडिंग ऐप्स, नकली निवेश योजनाएं और ऑनलाइन लोन स्कैम्स तेजी से बढ़ रहे हैं। कई लोग बिना जांच किए ऐसे विज्ञापनों पर भरोसा कर लेते हैं और बाद में भारी नुकसान झेलते हैं।

इसी वजह से एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आने वाले समय में भारत समेत कई देशों में टेक कंपनियों पर नियम और ज्यादा सख्त हो सकते हैं।

आगे क्या हो सकता है?

अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि यूरोपियन यूनियन इस मामले में कितना सख्त कदम उठाती है। अगर कंपनियां दोषी पाई जाती हैं, तो उन पर अरबों डॉलर का जुर्माना लग सकता है।

इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपने विज्ञापन सिस्टम और सिक्योरिटी मॉडरेशन को और मजबूत करना पड़ सकता है।

एक बात साफ है, आने वाले समय में सिर्फ नए फीचर्स और AI ही नहीं, बल्कि यूजर्स की ऑनलाइन सुरक्षा भी टेक कंपनियों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बनने वाली है।

Vishesh Pal

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Vishesh Pal is a content creator and writer who shares AI photo editing prompts, AI video editing tutorials, and useful digital tips.

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